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उज्जैन : रामघाट पर श्राद्ध से मिलता है 28 तीर्थों का पुण्य
गयाकोठा मंदिर पर प्रवेश प्रतिबंधित, परिसर में लोगों ने किया तर्पण पूजन
उज्जैन। आज से श्राद्ध पक्ष प्रारंभ हो गये हैं। अगले 16 दिनों तक हिंदू समाजजन पितृों की शांति और आशीर्वाद के लिये कर्मकांड व तर्पण करेंगे। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार रामघाट पर श्राद्ध व तर्पण करने से 28 तीर्थों का पुण्य फल प्राप्त होता है। अंकपात मार्ग स्थित गयाकोठा मंदिर में प्रशासन द्वारा प्रवेश प्रतिबंधित किया गया है, जबकि पंडितों द्वारा परिसर में यजमानों से कर्मकांड व तर्पण, पूजन कार्य सम्पन्न कराया।
श्राद्ध पक्ष में तर्पण व कर्मकांड का महत्व नदी और सरोवरों के किनारे बताया गया है। उसी के अनुसार देश भर से उज्जैन आने वाले लोग रामघाट और सिद्धनाथ घाट पर पूजन विधि सम्पन्न करते हैं। पं. आनंद गुरू लोटावाला ने बताया कि रामघाट पर श्राद्ध कर्म करने से 28 तीर्थों का पुण्य फल प्राप्त होता है। भगवान राम ने भी रामघाट पर पिता का पिण्डदान किया था। अंकपात मार्ग स्थित गयाकोठा तीर्थ पर श्राद्ध पक्ष में दूध व जल चढ़ाने से पितृओं की आत्मा को शांति व पुण्य फल प्राप्ति मिलती है। यहां कोरोना संक्रमण की वजह से प्रशासन द्वारा मंदिर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसको लेकर मंदिर परिसर के आसपास बोर्ड भी लगाये गये हैं। बावजूद इसके सुबह सैकड़ों की संख्या में लोग मंदिर पहुंचे, लेकिन उन्हें दर्शन पूजन के बिना ही लौटना पड़ा। पंडितों द्वारा गयाकोठा तीर्थ के निर्माणाधीन परिसर में यजमानों से कर्मकांड और तर्पण विधि, पूजन आदि सम्पन्न कराया। वहीं भेरवगढ़ स्थित सिद्धवट घाट पर भी सैकड़ों लोगों ने श्राद्ध पक्ष के पहले दिन पूजन अर्चन किया।
पूजन विधि में कोरोना नियमों का पालन
रामघाट, सिद्धनाथ घाट और गयाकोठा मंदिर परिसर में तर्पण, पूजन, श्राद्ध कर्म के लिये पहुंचने वाले लोगों से यहां मौजूद पंडितों द्वारा कोरोना नियमों का पालन कराया गया।
पूजन विधि करते समय यजमानों ने मुंह पर मास्क पहना था और सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन किया गया। पं. लोटावाला ने बताया कि रामघाट के पंडितों ने हाथ सेनेटराइज करने का भी इंतजाम किया गया। अधिकांश पंडित अपनी जेब में सेनेटराइज की छोटी शीशी रख रहे हैं